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जमीन बचाओ संघर्ष जारी, चौथे दिन भी वार्ता विफल

जिला संवाददाता जितेंद्र कुमार
आरा/तरारी। तरारी प्रखंड मुख्यालय परिसर में किसानों एवं मजदूरों की 37 एकड़ कृषि योग्य जमीन को आहर-पइन और पोखर के जीर्णोद्धार के नाम पर अधिग्रहण किए जाने के विरोध में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज चौथे दिन भी जारी रहा। धरना पर बैठे किसानों और संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों की प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के साथ एक बार फिर वार्ता हुई, लेकिन यह वार्ता भी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी जमीन को सुरक्षित रखने की लिखित गारंटी नहीं दी जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरनास्थल पर मौजूद किसानों ने प्रशासन पर उनकी आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि गरीब एवं भूमिहीन परिवारों की रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा उनकी कृषि भूमि है। यदि यह जमीन चली गई तो उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। किसानों ने कहा कि विकास के नाम पर गरीबों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि आगामी सोमवार को तीन सदस्यीय टीम द्वारा जमीन के बंदोबस्त की जांच की जाएगी। इस टीम में डीसीएलआर, एसडीएम तथा बंदोबस्त पदाधिकारी शामिल रहेंगे, जो पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे जांच टीम का स्वागत करते हैं, लेकिन जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती और किसानों के पक्ष में निर्णय नहीं आता, तब तक धरना जारी रहेगा। धरना की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी विंध्याचल पासवान ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई केवल 37 एकड़ जमीन की नहीं बल्कि गरीबों के हक और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा बड़े स्तर पर जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। धरना का संचालन युवा सामाजिक कार्यकर्ता रितेश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से चल रहा है और जब तक गरीबों को न्याय नहीं मिल जाता तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने क्षेत्र की जनता, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे आगे आकर इस न्याय की लड़ाई में अपना समर्थन दें। धरनास्थल पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में नारे लगाए– “गरीबों की जमीन हड़पना बंद करो”, “हम अपना हक लेकर रहेंगे”, “जमीन हमारी – फैसला हमारा” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंजता रहा। इस मौके पर कई ग्रामीण, किसान, मजदूर एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों को जल्द नहीं माना गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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